प्रणाम जी, हम उमाशंकर। आज हमारे समाज में हर तरह की सुख-सुविधाएं मौजूद हैं। अच्छे से अच्छा खान-पान है, रहने के लिए पक्के मकान हैं, फिर भी एक तकलीफदेह सच हमारे सामने है—हर दूसरा घर आज बीमारियों से परेशान है। अस्पताल छोटे पड़ रहे हैं और दवाइयों के पर्चे लंबे होते जा रहे हैं। क्या आपने कभी ठंडे दिमाग से सोचा है कि इतनी सुख-सुविधा होने के बावजूद लोग पहले से ज़्यादा बीमार क्यों पड़ रहे हैं? इसका एक बहुत सीधा और कड़वा जवाब है। हम सब जाने-अनजाने अपनी रोज़मर्रा की जिंदगी में हर काम उल्टा करने लगे हैं। कोई भी काम अपने सही और स्वाभाविक तरीके से नहीं हो रहा। विज्ञान और आयुर्वेद, दोनों ही इस बात को बखूबी रेखांकित करते हैं कि आज इंसानी शरीर को घेरने वाली 80% बीमारियां किसी बाहरी वायरस से नहीं, बल्कि सिर्फ और सिर्फ हमारी इन छोटी-छोटी गलत आदतों की वजह से पैदा हो रही हैं। वो कौन सी गलत आदतें हैं जो हम रोज़ 'उल्टी' कर रहे हैं? 1. पानी पीने का गलत तरीका: कड़क धूप और गर्मी से आते ही फ्रिज का बर्फीला पानी गले में उतार लेना हमारी आदत बन चुका है। खड़े-खड़े पेट में पानी ढतका लेना और खाने क...
आजकल की गर्मी पहले जैसी नहीं रही भाई साहब…ऐसा लगता है जैसे सूरज आग बरसा रहा हो।थोड़ी देर बाहर निकलो और शरीर जवाब देने लगता है। पारा 44 डिग्री के पार जा चुका है और गर्म हवाएं (लू) इंसानी शरीर को बीमार करने पर तुली हैं। अस्पतालों में पेट खराब, उल्टी, दस्त और डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) के मरीजों की भीड़ लगी है। जब शरीर जरूरत से ज्यादा गर्म होने लगता है तो: सिर भारी, चक्कर, कमजोरी, पसीना जैसी समस्या शुरू हो सकती है।शुरुआत में लोग ध्यान नहीं देते…फिर अचानक शरीर बैठ जाता है।कई लोग इसे मामूली समझते हैं।लेकिन गाँव के बुजुर्ग यूँ ही नहीं कहते थे: “ जेठ की धूप मजाक नहीं होती।” ऐसे में लोग गर्मी से तुरंत राहत पाने के लिए बाज़ार में मिलने वाले बर्फ वाले जूस या ठंडे कोल्ड-ड्रिंक्स का सहारा ले रहे हैं। हमारे बुजुर्ग एक बहुत खरी और पक्की बात कह गए हैं— "सस्ता रोवे बार-बार, महंगा रोवे एक बार।" लोग ₹20 के ठंडे लेकिन दूषित बर्फ वाले जूस के चक्कर में पड़कर बाद में डॉक्टरों को हज़ारों रुपए की फीस दे रहे हैं। सुबह के समय जब धूप हल्की हो, तो अपने दिन की शुरु...