आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम खाने की गुणवत्ता से ज्यादा मात्रा पर ध्यान देने लगे हैं। स्वादिष्ट भोजन सामने हो तो थोड़ा ज्यादा खा लेना आम बात है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि पेट भरने के बाद भी खाते रहना शरीर पर क्या असर डालता है? हमारे बुजुर्ग अक्सर कहा करते थे:"भोजन इतना करें कि शरीर को ऊर्जा मिले, बोझ नहीं।"यह बात आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। भूख से थोड़ा कम खाने का मतलब क्या है? सबसे पहले एक बात साफ कर लें।भूख से थोड़ा कम खाने का मतलब भूखे रहना नहीं है और न ही शरीर को जरूरी पोषण से वंचित करना है।इसका मतलब है कि जब भूख शांत हो जाए और पेट आराम महसूस करे, तब भोजन रोक देना। पेट को पूरी तरह भर देना हमेशा जरूरी नहीं होता।हमारे यहाँ सदियों से स्वास्थ्य का एक सीधा नियम बताया गया है— हमेशा अपनी भूख का सिर्फ 75% ही खाइए। यानी अगर आपको चार रोटी की भूख महसूस हो रही है, तो तीन रोटी पर ही रुक जाइए। पेट का एक हिस्सा हमेशा खाली रहना चाहिए आयुर्वेद क्या कहता है? आयुर्वेद में भोजन को स्वास्थ्य का आधार माना गया है। पारंपरिक आयुर्वेदिक विचार के अनुसार भोजन ऐसी मात्रा में करना चाहिए क...
क्या सच में तांबे का पानी अमृत है? बहुत दिनों बाद आज मन हुआ कि आपके साथ एक ऐसी आदत पर बात की जाए, जो लगभग हर भारतीय घर में देखी जाती है। हममें से बहुत से लोग रात को तांबे के लोटे या जग में पानी भरकर रखते हैं और सुबह उसे पीते हैं। लेकिन क्या हम इसके पीछे का सही विज्ञान और नियम जानते हैं? या बस देखा-देखी में कुछ भी किए जा रहे हैं? आइए आज बिना किसी बनावटी बात के, इसका पूरा सच समझते हैं। विज्ञान और आयुर्वेद क्या कहता है? जब हम तांबे (Copper) के बर्तन में 8 से 10 घंटे के लिए पानी रखते हैं, तो तांबे के गुण धीरे-धीरे पानी में आ जाते हैं। आधुनिक विज्ञान कहता है कि तांबे में प्राकृतिक रूप से 'एंटी-बैक्टीरियल' गुण होते हैं, जो पानी के हानिकारक कीटाणुओं को खत्म करने में मदद करते हैं विज्ञान यह मानता है कि तांबा (Copper) शरीर के लिए एक जरूरी सूक्ष्म खनिज (Trace Mineral) है। तांबा शरीर में कई महत्वपूर्ण कामों में मदद करता है, जैसे: लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में ऊर्जा उत्पादन में प्रतिरक्षा तंत्र (Immunity) के काम में कुछ एंजाइमों के कार्य में साथ ही, तांबे में कुछ जीवाणुरोधी...