क्या सच में तांबे का पानी अमृत है? बहुत दिनों बाद आज मन हुआ कि आपके साथ एक ऐसी आदत पर बात की जाए, जो लगभग हर भारतीय घर में देखी जाती है। हममें से बहुत से लोग रात को तांबे के लोटे या जग में पानी भरकर रखते हैं और सुबह उसे पीते हैं। लेकिन क्या हम इसके पीछे का सही विज्ञान और नियम जानते हैं? या बस देखा-देखी में कुछ भी किए जा रहे हैं? आइए आज बिना किसी बनावटी बात के, इसका पूरा सच समझते हैं। विज्ञान और आयुर्वेद क्या कहता है? जब हम तांबे (Copper) के बर्तन में 8 से 10 घंटे के लिए पानी रखते हैं, तो तांबे के गुण धीरे-धीरे पानी में आ जाते हैं। आधुनिक विज्ञान कहता है कि तांबे में प्राकृतिक रूप से 'एंटी-बैक्टीरियल' गुण होते हैं, जो पानी के हानिकारक कीटाणुओं को खत्म करने में मदद करते हैं विज्ञान यह मानता है कि तांबा (Copper) शरीर के लिए एक जरूरी सूक्ष्म खनिज (Trace Mineral) है। तांबा शरीर में कई महत्वपूर्ण कामों में मदद करता है, जैसे: लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में ऊर्जा उत्पादन में प्रतिरक्षा तंत्र (Immunity) के काम में कुछ एंजाइमों के कार्य में साथ ही, तांबे में कुछ जीवाणुरोधी...